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मंगलवार, 1 जून 2010

ग़ज़ल

चलो मित्र इतिहास पढ़ें
आहट और आभास पढ़ें

लोकतंत्र की जीत पढ़ें
राजवंश का नाश पढ़ें

कुम्भकर्ण की नींद पढ़ें
रावण, अट्टाहास पढ़ें

आँखों में अपमान की मुद्रा
होठों पर उपहास पढ़ें

कहीं बिलखती भूख पढ़ें
कहीं तड़पती प्यास पढ़ें

यौवन की दहलीजों पर
खड़ें हैं जो मधुमास पढ़ें

नयनों में सारी पृथ्वी
आँचल में आकाश पढ़ें

गर्म शिशु के गालों सा
नर्म-नर्म अहसास पढ़ें

जिन्हें गृहस्थी बोझ लगे
वे सज्जन संन्यास पढ़ें

भाग-दौड़ में नित्य क्रिया
फुर्सत में अवकाश पढ़ें

आप गुफा में रहतें हैं
आप अवश्य प्रकाश पढ़ें.

हर मुश्किल आसाँ होगी
हम सम्मिलित प्रयास पढ़ें

2 टिप्‍पणियां:

  1. आप गुफा में रहतें हैं
    आप अवश्य प्रकाश पढ़ें.
    बहुत सुंदर ... खास तौर पर अंतिम पंक्तिया ... लाजवाब !

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