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गुरुवार, 13 मई 2010

ग़ज़ल

तेरी तक़दीर में पायल का कारा हो नहीं सकता
तुम्हारे पांव का अलता तुम्हारा हो नहीं सकता

इसी के वास्ते दिल मेरा ये इसरार करता है
तुम्हे यह लाज का घूँघट गवारा हो नहीं सकता

ये मुमकिन है सियासत हो हमारे खून की प्यासी
वतन यह सिरफिरा सारा का सारा हो नहीं सकता

समय के सत्य का एहसास है अब कई खुदाओं को
अभी के दौर का इन्सां बिचारा हो नहीं सकता

बस इतना है की अपने मर्ज से गहरी मुहब्बत है
अलग इस दर्द से हरगिज गुजारा हो नहीं सकता

किसी बच्चे की आँखों में चमकते जुगनुओं जैसा
सितारा कोई भी ऐसा सितारा हो नहीं सकता

1 टिप्पणी:

  1. "किसी बच्चे की आँखों में चमकते जुगनुओं जैसा
    सितारा कोई भी ऐसा सितारा हो नहीं सकता "
    badhiya gazal.. har sher ek par ek aur antim sher sab par bhari.. behtreen !

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